Taptilok | Hindi Literary Magazine published from Surat, Gujarat, India. | Add to favorites
सम्पादकीय ताप्ती प्रवाह कविता कहानी लघुकथा व्यंग ललित निबंध
साहित्य विचार संस्कृति चिंतन जीवन विवेक ग्रंथावलोकन समाचार यात्रा-वृत प्रतिभाव
लोकतेज देश - दुनिया के ताजा समाचार
कविता

एक बार फिर

डॉ. रामाश्रय 'सविता'
नैतिकता है निराश,
हमदर्दी है हताशे,
इसका कुछ तो करें उपाय,
एक वार और, एक बार फिर।

आंखों का सूख गया पानी,
इसमें है किसकी नादानी,
पैशाची पन्नो पर लिखते
राो-राो बेतु की कहानी।

लौकिकता से लगाव,
अपनेपन का अभाव,
इसका कुछ तो करे उपाय,
एक बार और, एक बार फिर।

आत्मा से पूछ रही वाणी,
क्या अब भी हो कुम कल्याणी?
भौतिकता की अन्धी दौड़ में
भाग रहा एक-एक प्राणी।

आपस में भेद-भाव,
कुनबों में मनमुटाव,
इसका कुछ तो करें उपाय,
एक बार और, एक बार फिर।

चेहरे पर चेहरे चिपकाये,
लोग खूब बन-बनकर आये,
बाहर से खुशी का दिखावा,
भीतर से नैन डबडबाये।

बारूदी खेलकूद,
ंखतरे में है वजूद,
इसका कुछ तो करें उपाय,
एक बार और, एक बार फिर।

55828 घ, सुन्दर नगर,आलमबाग,
लखनऊ-226005


हमारे साथ विज्ञापन करें | अपने सुझाव | सबस्क्राईब करे | सूचना | हिन्दी साहित्य की प्रमुख वेबसाईट्स
ताप्तीलोक पब्लिकेशन्स, गंगोत्री, न्यू सिविल रोड, सूरत - 1
2005-07 copyright www.taptilok.com | Taptilok | Hindi Literary Magazine
Designed by Sri Technocrat | Best viewed in 800 X 600